छत्तीसगढ़

17 मार्च से जिले में शिशु संरक्षण माह अभियान शुरू

Shantanu Roy
12 March 2026 10:29 PM IST
17 मार्च से जिले में शिशु संरक्षण माह अभियान शुरू
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Mahasamund. महासमुंद। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार जिले में 17 मार्च 2026 से 21 अप्रैल 2026 तक शिशु संरक्षण माह अभियान का आयोजन किया जाएगा। यह अभियान जिले के सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को विशेष स्वास्थ्य सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ पोषण संबंधी सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी।

अभियान का उद्देश्य
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में कुपोषण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम करना है। इसके तहत 9 महीने से 59 महीने तक के बच्चों को विटामिन-ए सिरप पिलाया जाएगा। वहीं 6 महीने से 59 महीने तक के बच्चों को आयरन और फोलिक एसिड सिरप वितरित किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास सुचारू रूप से हो और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो।

अभियान का कार्यान्वयन
डॉ. राव ने बताया कि अभियान के प्रभावी संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से विस्तृत माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से गांव-गांव में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों तक अभियान का लाभ पहुंचाना है। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र या स्वास्थ्य केंद्र पर निर्धारित तिथियों पर अपने बच्चों को अवश्य लेकर आएं। अभियान के दौरान बच्चों का वजन और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा, एनीमिया की जांच होगी और अभिभावकों को पोषण और स्तनपान संबंधी परामर्श भी दिया जाएगा।

विटामिन-ए और आयरन फॉलिक एसिड का महत्व
डॉ. राव ने बताया कि विटामिन-ए बच्चों की आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने में सहायक होता है और रतौंधी से बचाव करता है। इसके अलावा यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे वे संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ पाते हैं। आयरन और फोलिक एसिड सिरप बच्चों में एनीमिया को रोकने और स्वस्थ रक्त निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभियान के दौरान गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उपचार के लिए आवश्यकतानुसार रेफर किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चों का समय पर समुचित इलाज किया जा सके और उनकी सेहत में सुधार आए।

अभिभावकों के लिए संदेश
डॉ. राव ने अभिभावकों से विशेष अनुरोध किया कि वे अपने बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र या आंगनबाड़ी केंद्र में अवश्य लेकर आएं, ताकि बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित हो। साथ ही बच्चों को विटामिन-ए और आयरन फॉलिक एसिड की खुराक देकर उनके स्वास्थ्य को मजबूत बनाया जा सके। इस अभियान के तहत जिले में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी संपूर्ण निगरानी और रिपोर्टिंग की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी लक्ष्यित बच्चों तक आवश्यक सेवाएं पहुँचें और स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हो।
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